
नई दिल्ली। राज्यसभा में शुक्रवार को मनोनीत सांसद सुधा मूर्ति ने एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दे को उठाया। उन्होंने पैरों के संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित फुट रिफ्लेक्सोलॉजी चिकित्सा को आयुष प्रणाली में शामिल करने का सुझाव दिया। यह प्राकृतिक और गैर-आक्रामक उपचार दर्द निवारण और तनाव मुक्ति में कारगर साबित होता है।
सुधा मूर्ति ने सदन को बताया कि पैर शरीर का ऐसा हिस्सा है जिसकी उपेक्षा आम है, लेकिन इसके रिफ्लेक्स पॉइंट्स को उत्तेजित करने से गहरी राहत मिलती है। थाईलैंड, इंडोनेशिया जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में यह लोकप्रिय चिकित्सा है।
भारत की पारंपरिक मालिश की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे विदेशी भारत आते हैं मालिश के लिए, वैसे ही वहां फुट रिफ्लेक्सोलॉजी प्रसिद्ध है। बुजुर्गों के लिए यह सुरक्षित विकल्प है।
आयुष मंत्रालय से अपील करते हुए मूर्ति ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण के साथ इसे अस्पतालों में जोड़ने की बात कही। मधुमेह रोगियों के पैरों की समस्या पर जोर देते हुए कहा कि हर अस्पताल में फुट केयर विभाग जरूरी है।
इससे डायबिटीज में शुरुआती हस्तक्षेप, दर्द नियंत्रण और समस्या पहचान संभव होगी। सुधा मूर्ति ने पैरों की देखभाल को स्वास्थ्य नीति का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।