
चीन, जो कभी अपनी एकल संतान नीति के लिए कुख्यात था, अब उलट फेर कर रहा है। देश की जन्मदर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिसके चलते सरकार महिलाओं से अधिक बच्चे पैदा करने की गुजारिश कर रही है। जनवरी में जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में मात्र 7.92 मिलियन शिशुओं का जन्म हुआ, जो 2024 के 9.54 मिलियन से 17 प्रतिशत कम है। प्रति हजार पर जन्मदर 5.63 रह गई, जो 1949 के बाद सबसे कम है।
1979 से लागू एक बच्चा नीति ने जबरन गर्भपात, नसबंदी और सजाओं के जरिए आबादी रोकी। बेटों की लालसा ने लिंग अनुपात बिगाड़ दिया। 2016 में दो बच्चे और फिर तीन बच्चे की नीति अपनाई गई, लेकिन गिरावट रुकी नहीं।
युवा जोड़े महंगाई, करियर दबाव, कार्यस्थल भेदभाव और जिम्मेदारियों से घबराते हैं। भले प्रोत्साहन दिए जा रहे हों, महिलाएं पूर्व आघातों से सतर्क हैं। विशेषज्ञ कहते हैं, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अनदेखी आर्थिक मजबूरी थोप रही है। श्रमिक कमी, पेंशन संकट और बुजुर्ग आबादी से देश संकट में है। क्या ये प्रयास सफल होंगे?