
नई दिल्ली। कोविड-19 वैक्सीन को लेकर प्रजनन क्षमता पर फैली अफवाहों को एक बड़े स्वीडिश अध्ययन ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। लगभग 60,000 महिलाओं पर आधारित इस शोध से साबित हुआ कि एमआरएनए वैक्सीन का गर्भधारण या गर्भपात पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।
महामारी के दौरान सोशल मीडिया पर बिना सबूत के दावे उड़ते रहे कि टीका लगवाने से बांझपन हो जाता है। यूरोप में जन्म दर गिरने से शक और गहरा गया।
लिंकोपिंग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थॉमस टिम्पका के नेतृत्व में किया गया यह अध्ययन कम्युनिकेशंस मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुआ। 2021 से 2024 तक 18-45 वर्ष की महिलाओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, जिसमें 75 प्रतिशत को वैक्सीन मिल चुकी थी।
वैक्सीनेटेड और अनवैक्सीनेटेड महिलाओं में जन्म, गर्भावस्था या मिसकैरेज में कोई फर्क नहीं मिला। “जन्म दर में कमी का कारण वैक्सीन होने की संभावना न के बराबर है,” टिम्पका ने कहा।
यह शोध पहले के निष्कर्षों को मजबूत करता है, जो आईवीएफ मरीजों तक सीमित थे। इसमें उम्र व बीमारियों जैसे कारकों को भी शामिल किया गया।
कोविड संक्रमण गर्भवती महिलाओं के लिए खतरा है, लेकिन वैक्सीन जोखिम घटाती है। टिम्पका की सलाह: “परिवार शुरू करने वाली महिलाएं बिना हिचक वैक्सीन लें।”
यह स्टडी भ्रम दूर कर महिलाओं को सशक्त बनाती है।