
नई दिल्ली में फिल्म ‘गोदान’ के 6 फरवरी को रिलीज होते ही विवाद ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस पार्टी लगातार इस फिल्म पर बैन की मांग कर रही है और इसे समाज में नफरत फैलाने वाला बता रही है। लेकिन विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कांग्रेस को करारा जवाब देते हुए उसके अतीत के काले कारनामों की याद दिलाई है।
बंसल ने कहा कि 1966 की 7 नवंबर को दिल्ली के वोट क्लब में इंदिरा गांधी के शासनकाल में गो भक्तों पर गोली चलाने की घटना भारत के इतिहास का काला अध्याय है। ‘शांतिपूर्ण भीड़ में गो माता के भक्त और संत थे, लेकिन पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग की। कितने मारे गए, इसका आंकड़ा आज तक नहीं,’ उन्होंने तंज कसा। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई भक्तों को गुप्त जगहों पर ले जाकर मार दिया गया।
‘राम भक्तों पर हमलों के बाद अब गोदान पर बैन? पहले माफी मांगो,’ बंसल ने चेतावनी दी। उन्होंने संसद से अपील की कि पूरे देश में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगे और गो माता को उचित सम्मान मिले।
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश नेता अंशू अवस्थी और पूनम पंडित सहित मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी फिल्म का विरोध किया है। निर्माता विनोद कुमार चौधरी, पारूल चौधरी और सह-निर्माता चेतन गोस्वामी की यह फिल्म अमित प्रजापति ने निर्देशित की है। यह विवाद अब सियासी रंग ले चुका है, जहां इतिहास और वर्तमान आमने-सामने हैं।