
मुंबई। मात्र 16 साल की उम्र में अभिनेता हर्षवर्धन राणे ने एक्टिंग के सपनों को सच करने के लिए घर छोड़ दिया था। फिल्मी दुनिया में सफलता पाना आसान नहीं था, लेकिन उनकी अटूट इच्छाशक्ति ने हर बाधा को पार कर लिया।
‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानगी’ जैसी हिट फिल्मों से दर्शकों का दिल जीतने वाले हर्षवर्धन पूरी तरह बाहरी कलाकार थे। कोई गॉडफादर नहीं, फिर भी उन्होंने बॉलीवुड के साथ-साथ साउथ सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने खुलासा किया कि हमेशा लक्ष्यों पर नजर रखी। प्रोड्यूसर को लाभ पहुंचाना और दर्शकों को संतुष्ट करना उनका मकसद रहा। इसी कारण चुनौतियां कभी भारी न पड़ीं।
‘मेरा संकल्प इतना मजबूत था कि मुश्किलें कभी बड़ी न दिखीं। मेरे पास पॉडकास्ट के लिए घंटों संघर्ष की कहानियां ही नहीं हैं,’ उन्होंने कहा। ‘सपने इतने बड़े थे कि फोकस कभी पीछे की ओर न मुड़ा।’
हर्षवर्धन का यह नजरिया प्रेरणादायक है। वे काम की गुणवत्ता पर जोर देते हैं, जो उन्हें लगातार आगे ले जाता है। भविष्य में उनकी नई फिल्में दर्शकों के लिए उत्साह का विषय बनी रहेंगी।