
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में आम जनता और सरकारी तंत्र के बीच विश्वास की गहरी खाई सामने आई है। इप्सोस और फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफपीसीसीआई) के संयुक्त पारदर्शिता सर्वेक्षण ने धारणा और हकीकत के बीच चौकाने वाले अंतर को उजागर किया है।
इंडेक्स ऑफ ट्रांसपेरेंसी एंड अकाउंटेबिलिटी इन पाकिस्तान (आईटीएपी) को राजधानी में एक समारोह में लॉन्च किया गया। सर्वे से पता चला कि जनता सरकारी विभागों को नकारात्मक नजरिए से देखती है, लेकिन जिन्होंने प्रत्यक्ष संपर्क किया, उनके अनुभव अपेक्षा से बेहतर पाए गए।
दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक चले इस सर्वे में 82 जिलों और 195 से अधिक तहसीलों से 6,000 से ज्यादा लोगों से बातचीत हुई। सरकारी संस्थानों के 300 कर्मचारियों की राय भी शामिल की गई।
नतीजों में 68 फीसदी ने भ्रष्टाचार को आम बताया, जबकि सिर्फ 27 फीसदी को रिश्वत मांगने का सामना करना पड़ा। इप्सोस के एमडी अब्दुल सत्तार बाबर ने कहा, ‘भ्रष्टाचार ऊंचा है, लेकिन इसकी धारणा कहीं ज्यादा। अस्पतालों की छवि सुधर रही है।’
पिछले साल 53 फीसदी ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का सहारा लिया। 36 सवालों पर आधारित यह रिपोर्ट पारदर्शिता मापने का स्वदेशी पैमाना बनेगी। सरकार को अब धारणाओं को बदलने के लिए कदम उठाने होंगे।