
बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से जुड़े विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुंबई विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम से शाह को आमंत्रित करने के बाद उन्हें हटाए जाने को उन्होंने सांप्रदायिकता और कट्टरता करार दिया।
कार्यक्रम आयोजकों का कहना है कि शाह ने खुद भाग लेने से इंकार कर दिया, लेकिन दोनों पक्षों के बयानों ने बहस छेड़ दी। मौलाना रजवी ने कहा, ‘नसीरुद्दीन शाह देश की प्रमुख हस्ती हैं। उनकी बात को सुनना जरूरी है। हर राय को देशद्रोह नहीं ठहराया जा सकता। संविधान की खूबी यही है कि लोग खुलकर सरकार की आलोचना कर सकें।’
उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतियों पर सवाल उठाना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन विश्वविद्यालय में जो हुआ वह असहिष्णुता दर्शाता है।
मौलाना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की। ‘योगी उत्तराखंड या असम के मुख्यमंत्रियों की तरह मुसलमानों को तंग नहीं करते। उनका फोकस विकास पर है। हिंदू-मुस्लिम में भेदभाव नहीं करते, इसलिए कई मुसलमान उनका समर्थन करते हैं।’
मदरसों पर कोई बंदी का आदेश सीएम ने नहीं दिया, बल्कि कोर्ट के निर्देशों पर कार्रवाई हुई। यह बयान धार्मिक सद्भाव की अपील करता है।