
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 के पेपर-दो (सीएसएटी) के कुछ सवालों को चुनौती देने वाली असफल अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अमित महाजन और अनिल क्षत्रियाल की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनाल (कैट) के आदेश को सही ठहराया।
अभ्यर्थियों का दावा था कि सीएसएटी में करीब 11 प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे, जो कक्षा 10 के स्तर के होने चाहिए थे, जबकि वे 11वीं-12वीं के एनसीईआरटी पर आधारित थे। इससे सभी को समान अवसर नहीं मिला।
न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में न्यायिक समीक्षा का दायरा अत्यंत सीमित है। विशेषज्ञों की राय को चुनौती देने या अपनी मर्जी थोपने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं, जब तक मनमर्जी या गलत नीयत न साबित हो।
यूपीएससी ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पेश की, जिसमें सभी विवादित प्रश्नों को पाठ्यक्रम के अनुरूप पाया गया। गणित के सवाल भी कक्षा 10 के स्तर से ऊपर नहीं थे। खंडपीठ ने कहा, विशेषज्ञों का मूल्यांकन अंतिम है, कोर्ट इसकी पुनः जांच नहीं कर सकता।
चयनित अभ्यर्थियों को पक्षकार न बनाने पर भी आपत्ति जताई। मेरिट लिस्ट बदलने या नई परीक्षा जैसी राहतें उनके अधिकारों का हनन करेंगी। पूरी प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है, अतः हस्तक्षेप उचित नहीं।
याचिका खारिज कर कोर्ट ने कहा, बड़े सार्वजनिक परीक्षाओं में ऐसी राहतें व्यवस्था को ठप कर देंगी। यह फैसला परीक्षा प्रक्रिया की अखंडता को मजबूत करता है।