
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जेल में बंद कांग्रेस विधायक सतीश सैल को लिवर ट्रांसप्लांट के लिए मेडिकल बेल प्रदान कर दी गई। कारवार क्षेत्र से विधायक सैल अब अपनी जान बचाने वाली सर्जरी करा सकेंगे।
न्यायालय ने सख्त शर्तें लगाई हैं। सैल को हर दो सप्ताह में ट्रांसप्लांट की प्रगति की रिपोर्ट जमा करनी होगी। साथ ही, हर आठ सप्ताह में स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि गवाहों से छेड़छाड़ या मुकदमे में बाधा डालने की कोई कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी।
इसके अतिरिक्त, 5 लाख रुपये का सिक्योरिटी बॉन्ड और व्यक्तिगत जमानत जमा करने का आदेश दिया गया है। यह कदम न्यायिक निगरानी को मजबूत बनाता है।
मामला 9 सितंबर 2025 को तब तूल पकड़ा जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बेंगलुरु में पूछताछ के दौरान सैल को गिरफ्तार किया। अवैध लौह अयस्क निर्यात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।
इससे पहले 13-14 अगस्त 2025 को ईडी ने कारवार, गोवा, मुंबई और दिल्ली में सैल के ठिकानों पर छापे मारे। भारी नकदी, सोना, गहने और दस्तावेज जब्त हुए, जो दो ट्रंक में पैक किए गए।
सैल केंद्रीय एजेंसियों द्वारा पकड़े गए तीसरे कांग्रेस विधायक बने। चित्रदुर्ग के केसी वीरेंद्र और धारवाड़ ग्रामीण के विनय कुलकर्णी पहले थे।
बेलकेरी अवैध लौह अयस्क मामले में 26 अक्टूबर 2024 को विशेष अदालत ने छह मामलों में सात साल की सजा और 44 करोड़ का जुर्माना ठोंका। 2010 का केस था, जिसमें सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की।
हालांकि, 21 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने सजा पर स्टे दे दिया। उपचुनाव रोकने और विधानसभा से वंचित रखने के आदेश थे, फिर ईडी ने लॉन्ड्रिंग केस में पकड़ा।
यह बेल स्वास्थ्य और कानून के बीच संतुलन का उदाहरण है।