
राज्यसभा में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि भविष्योन्मुखी व्यापार समझौते भारत की लंबी अवधि की आर्थिक रणनीति के मूलभूत हिस्से हैं। उन्होंने कहा कि देश तेज कदमों से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।
राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में पीएम मोदी ने ‘सुधार-प्रदर्शन-परिवर्तन’ के मंत्र पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत विश्व की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की सूची से बाहर निकलकर ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार हो चुका है और अब तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने की ओर लपका जा रहा है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने विश्व व्यवस्था के बदलाव में भारत की ओर वैश्विक झुकाव बढ़ रहा है, जो ‘विश्व बंधु’ के रूप में उभर रहा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ हालिया व्यापारिक समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम ने ईयू डील को ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ करार दिया।
ये साझेदारियां भारत के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को मजबूत करती हैं और बदलती वैश्विक व्यवस्था में देश को विश्वसनीय साझीदार के रूप में स्थापित कर रही हैं। मजबूत विनिर्माण व्यवस्था होने पर दुनिया भारत के साथ व्यापार करना चाहेगी, यह कहते हुए उन्होंने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की उच्च विकास दर और कम मुद्रास्फीति की सराहना पर बल दिया।
21वीं सदी के दूसरे चतुर्थक को स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक दौर से जोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह अवधि विकसित भारत के निर्माण में उतनी ही सक्षम सिद्ध होगी। उनकी यह दृष्टि देश को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली है।