
भारत का शैक्षणिक क्षेत्र तेजी से विस्तार की ओर अग्रसर है। छात्रों की बढ़ती संख्या को पूरा करने के लिए 2035 तक करीब 30,000 एकड़ नई कैंपस भूमि और 2.7 अरब वर्ग फुट शैक्षणिक सुविधाएं जुड़ेंगी। इससे लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित हो सकता है, जो भारत को वैश्विक संस्थागत रियल एस्टेट के प्रमुख बाजारों में शुमार कर देगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2.5 करोड़ अतिरिक्त सीटों की आवश्यकता होगी। कैंपस निर्माण में ही 100 अरब डॉलर लगेंगे, जिसमें भूमि और छात्रावास शामिल नहीं हैं। जनसांख्यिकीय लाभ, नामांकन वृद्धि, शिक्षा का वैश्वीकरण और नियामक बदलाव इस विस्तार को बढ़ावा देंगे।
उच्च शिक्षा में नामांकन 2010-11 के 2.7 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 4.5 करोड़ हो गया। विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से 1,338 और कुल संस्थानों की 51,534 से 70,018 हो चुकी है।
केंद्रीय बजट में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का प्रावधान अंतर को मान्यता देता है। एफएचईआई नियमों से शीर्ष विदेशी विश्वविद्यालय बिना संबद्धता के कैंपस खोल सकते हैं। तीन चालू हैं, 13 की घोषणा हो चुकी, जिनमें यूके, अमेरिका व इटली के नामी संस्थान शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश ने स्टांप ड्यूटी छूट व सब्सिडी दी। गुजरात के गिफ्ट सिटी में अंतरराष्ट्रीय कैंपस ढांचा तैयार। महाराष्ट्र की नवी मुंबई एजु-सिटी में पांच विदेशी संस्थानों की प्रतिबद्धता।
यह विस्तार भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।