
नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को विपक्ष की नारेबाजी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीखी चुटकी ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे अब बुजुर्ग हो चुके हैं, इसलिए उन्हें बैठे-बैठे नारे लगाने की छूट मिलनी चाहिए। इस पर सदन में हंसी का ठहाका गूंज उठा।
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के भाषण की सराहना करते हुए कहा कि यह जीवन के हर क्षेत्र को छूता है। मध्यम वर्ग से गरीब, किसान से महिलाओं तक, विज्ञान-प्रौद्योगिकी से कृषि तक सभी का जिक्र किया गया है। युवाओं की भूमिका को भी रेखांकित करते हुए उन्होंने भारत के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताया।
21वीं सदी के दूसरे चरण को आजादी की लड़ाई से जोड़ते हुए मोदी ने कहा कि यह विकसित भारत के लिए निर्णायक काल है। देश तेजी से प्रगति कर रहा है और अब रुकना या पीछे मुड़ना मुनासिब नहीं। आर्थिक मोर्चे पर उच्च विकास दर और कम महंगाई की जोड़ी हमारी अर्थव्यवस्था की ताकत दिखाती है।
यह संबोधन न केवल विपक्ष को करारा जवाब देता है बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में एकजुटता का संदेश भी देता है।