
वॉशिंगटन, 5 फरवरी। अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट संधि आज आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई। इसके साथ ही दोनों परमाणु महाशक्तियों के रणनीतिक न्यूक्लियर हथियारों पर कोई कानूनी पाबंदी नहीं बची। यह संधि 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव द्वारा हस्ताक्षरित हुई थी।
न्यू स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी के तहत दोनों देशों ने तैनात न्यूक्लियर वॉरहेड्स को 1,550 और मिसाइलों व बॉम्बर्स को 700 तक सीमित करने का वादा किया था। निरीक्षण प्रक्रिया ने पारदर्शिता सुनिश्चित की, जिससे विश्वास बना रहा।
2021 में समाप्ति तय थी, लेकिन पांच वर्ष बढ़ाया गया। यूक्रेन संकट के बाद फरवरी 2023 में पुतिन ने निरीक्षण रोक दिया, नाटो की भूमिका का हवाला देते हुए। फिर भी रूस ने सीमाओं का पालन जारी रखने का भरोसा दिलाया। सितंबर 2025 में पुतिन ने एक और वर्ष के लिए विस्तार का प्रस्ताव दिया, लेकिन सहमति नहीं बनी।
अब दोनों देश स्वतंत्र हैं। नई मिसाइलें, हाइपरसोनिक हथियार और वॉरहेड्स बढ़ सकते हैं, जो खतरनाक होड़ छेड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चिंता जताई है कि इससे वैश्विक अस्थिरता बढ़ेगी। यूक्रेन जैसे संकटों में परमाणु खतरे की आशंका सताने लगी है। विशेषज्ञ आगाह कर रहे हैं कि बिना संधि के नियंत्रणहीन विस्तार परमाणु युद्ध की संभावना को बढ़ावा देगा। नई संधि की जरूरत है, लेकिन भरोसे की कमी चुनौती है।