
फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में प्रोफेसर सहस्त्रबुद्धे का किरदार भूलना मुश्किल है, जो दोनों हाथों से एक साथ लिखते थे। लेकिन असल जिंदगी में भी ऐसा ही कमाल दिखाते हैं अंगद बेदी। एम्बिडेक्स्ट्रस होने की उनकी दुर्लभ खूबी उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाती है। दुनिया में महज एक फीसदी लोग ही इस काबिलियत के मालिक होते हैं।
6 फरवरी 1983 को दिल्ली में जन्मे अंगद, पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी के बेटे हैं। क्रिकेट का माहौल बचपन से रहा, इसलिए उन्होंने खेल से शुरुआत की और दिल्ली अंडर-19 तक पहुंचे। लेकिन पिता की प्रसिद्धि का बोझ भारी पड़ा। लोगों ने उनके खेल से ज्यादा वंश पर ध्यान दिया। फिर भी, अभिनय की ललक ने उन्हें नई दिशा दी।
क्रिकेट छोड़ मॉडलिंग की, फिर 2004 में ‘काया तरण’ से बॉलीवुड में कदम रखा। 1984 दंगों पर बनी इस फिल्म में उनका अभिनय सराहनीय रहा। टीवी पर ‘कुकु ना कहो’, ‘एक्स्ट्रा इनिंग्स टी20’ और ‘इमोशनल अत्याचार’ जैसे शो होस्ट कर नाम कमाया। 2011 में ‘फालतू’ से फिल्मी कमबैक हुआ।
‘उंगली’, ‘डियर जिंदगी’, ‘टाइगर जिंदा है’ जैसी फिल्मों में अहम भूमिकाएं निभाईं। लेकिन 2016 की ‘पिंक’ ने करियर बदल दिया। नेगेटिव रोल ने सबका दिल जीत लिया।
दोनों हाथों की समान पकड़ अंगद के एक्शन और भाव-भंगिमा में कमाल दिखाती है। यह गुण उन्हें तेजी से नई स्किल्स सिखाने में मदद करता है।
2018 में नेहा धूपिया से गुप्त शादी की। दोनों के एक बेटी और बेटा हैं। अंगद कहते हैं, संघर्ष में बेचारा बनना नहीं, मेहनत से पहचान बनानी है। उनकी कहानी प्रेरणा देती है।