
नई दिल्ली। डीएमके मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम के उत्तर भारतीयों को लेकर दिए विवादास्पद बयान ने पूरे देश की राजनीति को हिला दिया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने हिंदी भाषी लोगों को तमिलनाडु में टेबल साफ करने, निर्माण कार्य करने और पानी पूरी बेचने तक सीमित बता दिया। इस बयान पर सत्ताधारी और विपक्षी दलों के नेताओं ने एकजुट होकर निंदा की है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इसे सुर्खियां बटोरने की चाल बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सबका साथ सबका विकास के मंत्र पर चल रही है। ऐसे बयान देश की एकता को कमजोर नहीं कर सकते।
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि विविधता में एकता हमारा मूलमंत्र है। डीएमके चुनावी हार के डर से उत्तर-दक्षिण विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने इसे राष्ट्र अपमान कहा, जबकि बिहार मंत्री दीपक प्रकाश ने एकता की अपील की। कांग्रेस के तारिक अनवर ने पलायन की मजबूरी बताई। एआईएडीएमके के कोवई सत्यान ने डीएमके के दोहरे चरित्र पर चुटकी ली।
यह विवाद प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा और राजनीतिक अवसरवाद को उजागर करता है। देश को एकजुट रखने के लिए नेताओं को जिम्मेदार बयानबाजी करनी चाहिए।