
पटना, 5 फरवरी। राज्य में छात्राओं की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच बिहार पुलिस ने गर्ल्स हॉस्टल और लॉज के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। हालिया आपराधिक वारदातों ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है, जिसके जवाब में ये कदम उठाए गए हैं।
अपराध अनुसंधान विभाग और कमजोर वर्ग इकाई ने 4 फरवरी को ये निर्देश दिए, जो सभी जिलों के एसपी तक पहुंच चुके हैं। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि महिलाओं का शिक्षण और आत्मनिर्भरता सुरक्षित माहौल पर टिका है। संविधान के अनुच्छेद 16 व 21 महिलाओं को समानता और सम्मानपूर्ण जीवन का अधिकार देते हैं। परिवार से दूर रहकर पढ़ने वाली बालिकाओं की चिंता बढ़ी है, इसलिए ये उपाय जरूरी हो गए।
हर थाना क्षेत्र के सभी हॉस्टल-लॉज का पंजीकरण अनिवार्य। महिला हेल्प डेस्क रजिस्टर में पता, मालिकाना हक समेत पूरी जानकारी दर्ज करेगी।
हॉस्टल में महिला वार्डन 24×7 ड्यूटी पर। वार्डन से लेकर गार्ड, रसोइया तक सभी का पुलिस वेरीफिकेशन जरूरी, विवरण थाने में दर्ज।
मुख्य गेट से गलियारे, डाइनिंग तक हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी आवाज रिकॉर्डिंग सहित। 30 दिन की फुटेज स्टोरेज। चारों ओर उजाला, मजबूत दरवाजे-खिड़कियां जालीदार, ताले पुख्ता। कमरों का साइज और संख्या बिल्डिंग कोड अनुसार, सफाई पर जोर।
विजिटर रजिस्टर में नाम, मोबाइल, आधार अनिवार्य। छात्रा क्षेत्र में पुरुष प्रवेश बंद, अलग विजिटर रूम। बायोमेट्रिक से रात की उपस्थिति चेक।
रिसेप्शन पर थाना, हेल्प डेस्क, अभया ब्रिगेड, 112 के पोस्टर। 112 ऐप के सुरक्षा फीचर सिखाए जाएंगे। संदेह पर वार्डन अभिभावक-पुलिस को अलर्ट।
एसएचओ, हेल्प डेस्क व ब्रिगेड जांच करेंगे। अभया का रोज दौरा, छात्राओं से बातचीत, समस्या रिपोर्ट। गंभीर उल्लंघन पर तत्काल एक्शन। ये नियम छात्राओं को निश्चिंत पढ़ाई का वातावरण देंगे।