
वॉशिंगटन में हलचल मची हुई है क्योंकि भारत पैक्स सिलिका ढांचे में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी ने खुलासा किया कि नई दिल्ली वैश्विक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह कदम इंडो-प्रशांत क्षेत्र में व्यापारिक चुनौतियों के बीच उठाया जा रहा है।
आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने बताया कि भारत इस महीने के अंत तक इसमें शamil हो जाएगा। उन्होंने भारत के तकनीकी कौशल की तारीफ की, जो चीन के मानव संसाधनों को टक्कर दे सकता है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित 50 देशों के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भाग लिया।
हेलबर्ग ने कहा कि अमेरिका भारत की भागीदारी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। यह पहल पारदर्शी और विविध आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाएगी, जो बाधाओं, मूल्य दबाव और रुकावटों से मुक्त होंगी। भारत की मौजूदा प्रसंस्करण क्षमता दोनों देशों के सहयोग को बढ़ावा देगी।
एआई क्रांति से कोबाल्ट, कॉपर और निकल जैसे खनिजों की मांग आसमान छू रही है। पैक्स सिलिका सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है, जबकि खनिज मंत्रिस्तरीय अपस्ट्रीम सुरक्षा सुनिश्चित करता है। भारत-अमेरिका साझेदारी साफ ऊर्जा और मजबूत चेन के लिए वरदान साबित होगी।
यह गठबंधन आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बनाता है। पुरानी आपूर्ति मॉडल अप्रासंगिक हो चुके हैं। भारत की भूमिका संयुक्त परियोजनाओं को गति देगी, जो दोनों देशों को मजबूत बनाएंगी।