
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में थकान, बेचैनी और गले की परेशानियां आम बात हो गई हैं। गलत जीवनशैली से गला भारी रहना या आवाज कमजोर पड़ना बड़ी समस्या बन गया है। आयुष मंत्रालय बताता है कि शरीर-मन का असंतुलन ही इनकी जड़ है। योग की ग्रंथित मुद्रा इन सबका सरल समाधान है।
यह हाथों की आसान मुद्रा गले, नसों और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालती है। रोजाना थोड़े अभ्यास से तनाव दूर होता है, मन को सुकून मिलता है।
गले की सेहत सुधारना इसका मुख्य लाभ है। बार-बार खराब होने वाला गला, आवाज बैठना या बोलने में थकान—ये सब दूर होते हैं। रक्त संचार बेहतर होने से जकड़न खत्म हो जाती है।
तनाव और घबराहट पर काबू पाने में भी कारगर। भीतर का बोझ हल्का होता है, गहरी सांसों से मस्तिष्क शांत होता है।
नींद की क्वालिटी बढ़ाने में मददगार। देर रात जागना, नींद टूटना या ज्यादा सपने—ये कम होते हैं। सोने से पहले करें तो गहरी नींद आती है।
ध्यान और स्मृति में वृद्धि होती है। छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए वरदान। एकाग्रता लंबे समय तक बनी रहती है।
मन हल्का होता है, चिड़चिड़ापन घटता है, आत्मविश्वास बढ़ता है। खुलकर बोलने का साहस आता है।
शांत जगह पर सुबह या शाम 10-15 मिनट करें। इस मुद्रा से जीवन में संतुलन और शांति लाएं।