
नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन में चीन एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की तैयारी कर रहा है। यह कदम भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे सुधार की ओर इशारा करता है, जो वर्षों के तनाव के बाद अब स्थिरावस्था में दिख रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का एक उप-मंत्री इस टीम का नेतृत्व कर सकता है। बीजिंग में भारतीय दूतावास ने वीजा व्यवस्था के लिए चीनी पक्ष से संपर्क साधा है, जैसा कि द एशिया ग्रुप के विशेषज्ञ जॉर्ज चेन ने पुष्टि की है। यह एआई इम्पैक्ट समिट में चीन की भागीदारी की पहली सार्वजनिक स्वीकृति है।
2020 की गलवान झड़प के बाद संबंधों में आई खाई को पाटने की प्रक्रिया अगस्त में तियानजिन शंघाई सहयोग संगठन समिट के दौरान मोदी-शी मुलाकात से तेज हुई। उसके बाद सीधी उड़ानें और पर्यटक वीजा बहाल होना जैसे कदम उठे।
चीन वैश्विक एआई नीतियों में अपनी स्थिति मजबूत करने को एससीओ जैसे मंचों का उपयोग कर रहा है। सम्मेलन में बिल गेट्स और डारियो अमोडेई जैसे दिग्गज शामिल होंगे, हालांकि चीनी नव वर्ष की छुट्टियों से टकराव चुनौती पैदा कर सकता है।
यह भागीदारी न केवल तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देगी, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का माध्यम बनेगी। एआई के दौर में ऐसे आयोजन भविष्य की कूटनीति का आधार तैयार करते हैं।