
मुंबई के चकाचौंध भरे फिल्मी दुनिया में कई संघर्ष छिपे रहते हैं, और सिद्धांत चतुर्वेदी ने इन्हीं में से एक पर खुलकर बोला। आगामी रोमांटिक ड्रामा ‘दो दीवाने शहर में’ में मृणाल ठाकुर के साथ नजर आने वाले इस अभिनेता ने उत्तर प्रदेश के बलिया की मिट्टी से जुड़ी अपनी जड़ों और भाषाई रुकावटों की बात की।
फिल्म के लॉन्च इवेंट में उन्होंने बताया कि उनका बचपन भोजपुरी की बोली में बीता, जहां मां आज भी भगवान शिव को ‘शंकर भगवान’ कहती हैं। इन सांस्कृतिक रंगों ने उनके बोलचाल और सोच को प्रभावित किया। मुंबई पहुंचने पर हिंदी की कमजोरी ने आत्मविश्वास को झकझोर दिया। पांच-छह साल तक उनकी हिंदी टूटी-फूटी रही, और बातचीत भोजपुरी में ही होती।
स्क्रिप्ट पढ़ते ही पुरानी यादें उमड़ आईं, और किरदार खुद से जुड़ा लगा। उन्होंने कहा कि बड़े शहर में भाषा की कमी सीधे आत्मसम्मान पर चोट करती है। ‘स’ और ‘श’ के उच्चारण, अंग्रेजी सीखने की कठिनाई, और क्षेत्रीय लहजे से होने वाली हिचकिचाहट—ये मुश्किलें यूपी-बिहार के अलावा राजस्थान, गुजरात, नॉर्थ-ईस्ट और नेपाल से आए लोगों में भी आम हैं।
ये छोटी बाधाएं धीरे-धीरे हौसले तोड़ देती हैं। रवि उद्यावर निर्देशित इस फिल्म का ट्रेलर बुधवार को रिलीज हुआ, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इला अरुण, जॉय सेनगुप्ता, आयेशा रजा, संदीपा धर जैसे कलाकारों से सजी फिल्म 20 फरवरी को सिनेमाघरों में धमाल मचाने को तैयार है। क्या यह बॉक्स ऑफिस पर कमाल करेगी?