
दुनिया के तेजी से बदलते परिदृश्य में भारत वैश्विक व्यापार का प्रमुख केंद्र बन चुका है। सभी देश इसे सुनहरा अवसर मान रहे हैं। इसी कड़ी में चीन का रुख भी नरम पड़ता दिख रहा है। भारत में चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने मंगलवार को कहा कि दोनों देशों के रिश्ते सुधार के नए स्तर को छू रहे हैं।
गलवान संघर्ष के बाद दोनों नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक ने रास्ता प्रशस्त किया। तियानजिन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की चर्चा के बाद सीधी उड़ानें शुरू हुईं, कैलाश मानसरोवर यात्रा बहाल हुई। चीनी पर्यटकों को वीजा मिलने लगा, जिससे संपर्क मजबूत हो गया।
नई दिल्ली के चाइनीज न्यू ईयर समारोह में राजदूत ने इसकी तारीफ की। उन्होंने अगस्त की मीटिंग को रिश्तों की नई शुरुआत बताया। सभी स्तरों पर आदान-प्रदान बढ़ा है। व्यापार 155.6 अरब डॉलर पर पहुंचा, 12 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि। भारत का निर्यात 9.7 प्रतिशत उछला।
शू ने इसे एशियाई दिग्गजों की अपार संभावनाओं का प्रमाण कहा। चीन का वैश्विक मेल-जोल भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ से मेल खाता है। गणतंत्र दिवस पर शी जिनपिंग ने ड्रैगन-हाथी के संयुक्त नृत्य की कामना की।
राजदूत ने समारोह में शिरकत की और कहा कि दोनों देश अच्छे पड़ोसी, साझेदार बनें। नवंबर में उन्होंने 15वीं पंचवर्षीय योजना पर कहा कि चीन व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने को तैयार है, मेक इन इंडिया से तालमेल बिठाते हुए। यह दौर दोनों देशों के लिए समृद्धि लाएगा।