
प्रयागराज के पावन घाटों पर आयोजित माघ मेला इस बार स्वदेशी का अनोखा प्रदर्शन बन गया है। ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत स्थानीय हस्तशिल्प, खादी के वस्त्र, मिट्टी के बर्तन और ग्रामीण उत्पादों को प्रमुख स्थान मिला है। श्रद्धालु और सैलानी इनकी बंपर खरीदारी कर आत्मनिर्भर भारत को मजबूत बना रहे हैं।
यह मेला पारंपरिक कला को नई उड़ान दे रहा है। गांवों के कुशल कारीगरों के हाथों बने सामान न केवल बाजार पा रहे हैं, बल्कि उनकी आजीविका को स्थायी आधार भी प्रदान कर रहे हैं। मेले की रौनक में स्वदेशी स्टालों की चमक सबसे अलग है।
खरीदारों का उत्साह देखते ही बनता है। ‘ये उत्पाद संस्कृति की जीवंत छवि हैं और गुणवत्ता में विदेशी से कहीं बेहतर,’ कहते हुए लोग इन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं। दुकानदारों का मानना है कि सरकारी योजनाओं ने जागरूकता बढ़ाई है।
स्टाल संचालिका रुकसाना ने कहा, ‘इस बार कारोबार चरम पर है, आमदनी दोगुनी हो गई। एक जिला-एक उत्पाद योजना से ग्राहक आकर्षित हो रहे हैं।’ उनकी सफलता अन्य कारीगरों के लिए प्रेरणा है।
ग्राहक हिमांशु तिवारी बोले, ‘विविधता और उत्कृष्टता का अनुभव हो रहा है। स्वदेशी को बढ़ावा देकर हम कारीगरों का हित साध रहे हैं।’ अधिक स्टालों से विकल्प बढ़े हैं।
माघ मेला धार्मिक महत्व के साथ आर्थिक केंद्र बन गया है, जहां स्वदेशी को सम्मान और बाजार दोनों मिल रहे हैं। यह स्थानीय उद्योगों के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।