
बिहार के मुंगेर जिले में बसा सीताकुंड मंदिर देशव्यापी आस्था का प्रतीक है। रामतीर्थ के नाम से भी विख्यात यह स्थान रामायण की अमर कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि यहीं मां सीता ने अपनी पवित्रता सिद्ध करने हेतु अग्निपरीक्षा दी थी। इसके बाद भूमि से एक उष्ण कुंड प्रकट हुआ, जिसका जल आज भी गर्मावस्था में बहता है।
मुंगेर मुख्यालय से मात्र 8 किमी दूर नौवागढ़ी उत्तरी पंचायत में अवस्थित यह कुंड वर्ष भर गर्म रहता है। सर्दी का असर न पड़ने वाली इस विशेषता से सभी चकित हैं। मंदिर परिसर में राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के नाम पर चार अन्य कुंड हैं, किंतु उनका जल सामान्य या ठंडा रहता है।
देश-प्रदेश से श्रद्धालु स्नान को आते हैं, पर माघ मास में सीताकुंड मेला चरम पर होता है। वर्ष 2026 में 1 फरवरी से प्रारंभ होकर एक माह चलने वाला यह मेला पहली बार राजकीय दर्जा प्राप्त कर चुका है। लाखों भक्त स्नान कर पूजन करते हैं, भक्ति का अनोखा संगम दर्शनीय बनता है।
कुंड के गर्म जल का रहस्य आज भी अनसुलझा है। 20 फुट लंबाई-चौड़ाई और 12 फुट गहराई वाले इस कुंड पर वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं की निगाहें टिकी हैं। इतिहासकार इसे रामायण युग से जोड़ते हैं। सीताकुंड आस्था और विज्ञान के मेल का प्रतीक बनकर दर्शनार्थियों को आमंत्रित करता रहता है।