
नई दिल्ली। अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाने से टेक्सटाइल क्षेत्र को अपार लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उद्योग को नई गति प्रदान करेगा और व्यापार में स्थिरता लाएगा।
दक्षिण भारत मिल्स एसोसिएशन के महासचिव जे. सेल्वराज ने कहा कि यह दर प्रतिस्पर्धी देशों में सबसे कम है, जिससे भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति मजबूत होगी। ब्रिटेन व यूरोपीय संघ के साथ हालिया समझौतों और केंद्रीय बजट 2026-27 से उद्योग में उत्साह का संचार हुआ है।
कृषि अर्थशास्त्री डॉ. आरएस घुमन ने बताया कि टैरिफ में कटौती से दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात बढ़ेगा, जिससे राष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी। उन्होंने गुणवत्ता सुधार पर जोर देते हुए कहा कि डेयरी व कृषि उत्पादों को इस सौदे से बाहर रखा गया है।
कॉटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के उपाध्यक्ष रवि सैम ने पूर्वの高 टैरिफ से मैन्युफैक्चरर्स की परेशानियों का जिक्र किया। अब 18 प्रतिशत टैरिफ से उद्योग को बड़ी राहत मिली है।
विदेश व्यापार विशेषज्ञ सीए संजय एम धारीवाल के अनुसार, यह सौदा टेक्सटाइल व कृषि के साथ-साथ आईटी व फार्मा जैसे क्षेत्रों को भी लाभ पहुंचाएगा। कुल मिलाकर, यह समझौता भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।