
2025 में ‘एलिस थ्रेशहोल्ड’ शब्द ने अमेरिकी सोशल मीडिया पर धूम मचा दी। गेमिंग की दुनिया से निकला यह शब्द अब आम अमेरिकियों की आर्थिक कमजोरी को दर्शाता है, जहां एक छोटी सी विपत्ति सबकुछ तबाह कर देती है।
जरूरी खर्चों के बाद हाथ में कुछ न बचने से लोग संकट की कगार पर जीते हैं। नौकरी छूटना या बीमारी आते ही कर्ज का बोझ और ऊंची महंगाई उन्हें बेघर बना देती है। अमेरिका में बेघरों की औसत आयु महज 3-5 साल होती है, जो समाज की क्रूर वास्तविकता को उजागर करता है।
दूसरी ओर, चीन की ‘न्यूनतम जीवन भत्ता रेखा’ एक मजबूत सुरक्षा कवच है। 1990 के दशक में शुरू हुई यह व्यवस्था अब शहरों और गांवों तक फैल चुकी है। आय इस रेखा से नीचे गिरे तो सरकारी मदद फौरन मिलती है।
गरीबी उन्मूलन से जुड़ी यह प्रणाली सटीक पहचान और गतिशील प्रबंधन से सबसे जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाती है। 2020 तक चीन ने पूर्ण समृद्धि हासिल की, जिसमें इस नीति की भूमिका सराहनीय रही। दोनों देशों का यह फर्क वैश्विक कल्याण नीतियों पर सवाल खड़े करता है।