
नई दिल्ली में राजनीतिक तापमान बुधवार को चरम पर पहुंच गया जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। राष्ट्रपति अभिभाषण पर लोकसभा चर्चा के दौरान राहुल के अप्रकाशित किताब के अंश पढ़ने से हंगामा मच गया था। दुबे ने इसे संसद को तीन दिनों से बंधक बनाने का आरोप लगाया।
पत्रकारों से रूबरू होते हुए दुबे ने कहा, ‘राहुल गांधी को सदन के नियमों की abc तक नहीं आती। वे ऐसी किताब का जिक्र कर रहे हैं जो छपी तक नहीं। अगर ऐसी किताबों पर चर्चा हो सकती है, तो बैन किताबों पर क्यों नहीं?’ उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार पर सवाल उठाने वाली कई प्रतिबंधित किताबों का जिक्र किया।
चार्ल्स की ‘इंडिया इंडिपेंडेंट’ में नेहरू, माउंटबेटन और एडविना द्वारा देश विभाजन का षड्यंत्र बताया गया है, जो 1964 में बैन हुई। ‘एडविना एंड नेहरू’ उपन्यास में दोनों के निजी मुलाकातों का विवरण है। दुबे ने ‘द लाइफ ऑफ इंदिरा नेहरू गांधी’ का हवाला दिया, जिसमें इंदिरा के कथित संबंधों और केजीबी फंडिंग के आरोप हैं।
‘नेहरू: ए पॉलिटिकल बायोग्राफी’ में नेहरू पर 1921 से 1964 तक भारत तोड़ने, धोखे और अनैतिकता के इल्जाम हैं। ‘बिगिनर्स एंड नेहरू एज’ में एमओ मथाई के खुलासे हैं कि इंदिरा 12 साल तक उनके साथ रहीं। इसके अलावा ‘सीजफायर’, ‘द आर्ट ऑफ इंडिया’, ‘नेपाल’, ‘कैप्टिव कश्मीर’ और ‘हिमालयन ब्लंडर’ जैसी किताबों का उल्लेख कर दुबे ने कांग्रेस परिवार की कथित सच्चाइयों पर पर्दा उठाया।
राहुल को ‘किताब खेल’ पसंद है तो इन पर बहस हो, दुबे ने चुनौती दी। यह विवाद संसदीय गरमाहट को नई ऊंचाई दे रहा है।
