
बॉलीवुड के आकाश में चमकते सितारों में अभिषेक बच्चन का सफर खासा प्रेरणादायक है। ऐश्वर्या राय का उनके जीवन में प्रवेश न केवल प्यार की कहानी था, बल्कि एक ऐसे जादू की तरह था जिसने उनके करियर के बंद दरवाजों को खोल दिया। जन्म 5 फरवरी 1976 को मुंबई में हुआ, अभिषेक को बचपन से ही पिता अमिताभ बच्चन की परछाई में जीना पड़ा। लेकिन ऐश्वर्या के साथ उनकी जोड़ी ने सब कुछ बदल दिया।
2000 में ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ से शुरू हुई उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ‘कुछ ना कहो’, ‘धूम 2’ और ‘उमराव जान’ जैसी फिल्मों में चमकी। ‘गुरु’ के बाद 2007 में शादी हुई, जिसके बाद अभिषेक ने सितारा बनने की होड़ छोड़ दी। उन्होंने चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं अपनाईं। ‘झूम बराबर झूम’ और ‘सरकार राज’ में उनकी एक्टिंग की गहराई सराही गई।
2008 की ‘दोस्ताना’ ने उनकी कॉमिक टाइमिंग से कमाल कर दिया। ‘पा’ में पिता के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई। ‘दिल्ली-6’, ‘रावण’ और ‘दम मारो दम’ में डार्क रोल्स ने नई ऊंचाइयां दीं। ‘बोल बच्चन’ के डबल रोल ने हंसी के फव्वारे छुड़ाए।
‘धूम 3’, ‘हैप्पी न्यू ईयर’ जैसी बड़ी फिल्मों से व्यावसायिक सफलता मिली। 2018 की ‘मनमर्जियां’ और ओटीटी हिट्स ‘लूडो’, ‘द बिग बुल’, ‘बॉब बिस्वास’, ‘दसवीं’ ने अभिनय का लोहा मनवाया।
फिल्मों के अलावा प्रो कबड्डी में जयपुर पिंक पैंथर्स की मालिकाना हकदारी और रियल एस्टेट में सफलता ने बिजनेस में भी धाक जमाई। अमिताभ की ‘जादूगर’ की तरह अभिषेक ने असल जिंदगी में जादू रचा, जिसमें ऐश्वर्या की भूमिका सर्वोपरि रही।