
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दिया। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने मामले में व्यावहारिक समाधान का भरोसा दिलाया।
ममता बनर्जी स्वयं कोर्ट में पेश हुईं और एसआईआर की कमियों को उजागर किया। उन्होंने शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं के नाम कटने, दस्तावेजों को न मानने, लंबी कतारें, BLO की आत्महत्याएं और 100 से अधिक मौतों का जिक्र किया। ‘बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है,’ उन्होंने कहा।
उनके वकील श्याम दीवान ने बताया कि 70 लाख लोगों को मामूली स्पेलिंग मिसमैच पर नोटिस भेजे गए। 8300 माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात हैं, जो संविधान में नहीं। आधार, डोमिसाइल जैसे प्रमाण-पत्र अस्वीकार हो रहे। अंतिम सूची के लिए 11 दिन बाकी हैं।
चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने राज्य सरकार पर जिम्मेदारी डाली, कहा कि केवल 80 अधिकारी दिए गए, इसलिए माइक्रो ऑब्जर्वर लगाए।
कोर्ट ने नामों में गड़बड़ी पर सतर्कता बरतने को कहा। सीजेआई ने आश्वासन दिया कि असली मतदाताओं का हक कोई नहीं छीन सकता। सोमवार को अगली सुनवाई होगी। यह मामला चुनावी तैयारी में संतुलन की मांग करता है।