
नई दिल्ली। शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मणिपुर में नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने इसे प्रजातंत्र को कुचलने का खतरनाक नमूना करार दिया। प्रियंका ने कहा कि हिंसा प्रभावित राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद चुनाव की बजाय सत्ता के गलियारों में ही अगला मुखिया तय कर लिया गया, जो संविधान और जनता के अधिकारों का अपमान है।
मणिपुर की घटनाक्रम ने पूरे देश को झकझोर दिया। पुराने सीएम को बने रहने दिया, रातोंरात राष्ट्रपति शासन थोपा, संसद से मंजूरी लेकर हटाया और बिना जनादेश के नया चेहरा थोप दिया। प्रियंका ने इसे लोकतंत्र के लिए घातक बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति शासन के बाद सामान्य प्रक्रिया चुनाव कराने की होती है, लेकिन यहां जनता की अनदेखी हुई।
संसद की कार्यप्रणाली पर भी उन्होंने निशाना साधा। विपक्ष की आवाज दबाना परंपराओं के विरुद्ध है। राहुल गांधी द्वारा गलवान संघर्ष पर पूर्व आर्मी चीफ की किताब पढ़ने की कोशिश को रोका गया, जो सच्चाई छिपाने की मिसाल है।
ममता बनर्जी की एसआईआर याचिका का समर्थन करते हुए प्रियंका ने कहा कि चुनाव आयोग का यह हथियार भाजपा के एजेंडे को बढ़ावा दे रहा है। बिहार से शुरू होकर बंगाल-तमिलनाडु तक वोटर अधिकारों पर प्रहार हो रहा। ममता संवैधानिक हथियारों से जवाबदेही ला रही हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को प्रियंका ने असमान ठहराया। ट्रंप के सोशल मीडिया से खुलासा, भारत पर 18% टैरिफ जबकि अमेरिका से शून्य। रूस-ईरान तेल बंदी के दबाव, न्यूक्लियर-स्पेस खोलना, किसानों को खतरा। यूरोपीय संघ समझौते से अलग, यह देश हितों के विरुद्ध है।
प्रियंका का बयान राजनीतिक बहस को नई ऊंचाई देता है।