
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को मीडिया के समक्ष प्रदर्शित करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि कैलाश रेंज में भारतीय सीमा में घुस आए चीनी टैंकों पर हमारी सेना हमला करने को तैयार थी, लेकिन उच्च नेतृत्व ने उन्हें पूरी तरह अकेला छोड़ दिया।
मीडिया से बातचीत में गांधी ने कहा, ‘लोग कहते हैं यह किताब不存在 है, लेकिन यह देखिए। भारत के हर नौजवान को इसे पढ़ना चाहिए। यह जनरल नरवणे की किताब है, फिर भी मुझे संसद में उद्धृत करने से रोका जा रहा है।’
किताब के आधार पर उन्होंने विस्तार से बताया कि जब नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को चीनी टैंकों की घुसपैठ की सूचना दी, तो कोई निर्देश नहीं मिला। विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से पूछा, फिर भी खामोशी। आखिरकार सिंह ने कहा कि ‘टॉप’ से पूछेंगे।
आदेश आया- बिना इजाजत फायरिंग न करें, भले चीन की सेना हमारी जमीन पर हो। गांधी ने कहा, ‘हमारी सेना हमला करना चाहती थी, लेकिन ‘टॉप’ ने कहा- जो ठीक लगे करो। यानी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।’
नरवणे ने किताब में लिखा, ‘मैं वाकई बहुत अकेला महसूस कर रहा था। पूरा सिस्टम मुझे छोड़ चुका था।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर पीएम लोकसभा आए तो यह किताब खुद सौंप देंगे।
यह खुलासा भारत-चीन सीमा विवाद पर नई बहस छेड़ रहा है। क्या सरकारी फैसलों ने सेना की पीठ थोड़ी? जवाबदेही की मांग तेज हो रही है।