
नई दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि यह सौदा अमेरिका के लिए तो ऐतिहासिक है, लेकिन भारत के हितों की रक्षा करता नजर नहीं आता। मंगलवार को विशेष बातचीत में चतुर्वेदी ने उजागर किया कि सौदे का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, बल्कि ज्यादातर जानकारियां ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट पर निर्भर हैं।
ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया, जो निर्यातकों को राहत दे सकता है। लेकिन बदले में भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और अन्य बाधाएं पूरी तरह हटा लीं। चतुर्वेदी ने चेतावनी दी कि इससे अमेरिकी सामान भारतीय बाजार में बिना रोक-टोक घुसपैठ कर सकता है, जो घरेलू उद्योगों के लिए खतरा है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी रियायतें साफ दिख रही हैं। ट्रंप का दावा है कि भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने, ईरान से क्रूड छोड़ने और वेनेजुएला की ओर रुख करने पर सहमति दी। पिछले साल अमेरिका से तेल आयात 10 प्रतिशत बढ़ा, सार्वजनिक कंपनियों ने एलपीजी अनुबंध साइन किए। आनंद फानन शांति विधेयक को भी अमेरिकी हितों से जोड़ा गया।
अमेरिकी सीनेटरों के पोस्ट से पता चलता है कि कृषि, कोयला जैसे क्षेत्रों में बाजार खोलने की सहमति हुई। चतुर्वेदी ने किसानों की सुरक्षा दीवार गिराने पर चिंता जताई। निर्यात राहत अच्छी है, लेकिन कुल मिलाकर अमेरिका को फायदा ज्यादा लग रहा।
इसके अलावा, राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख की किताब के अंश का जिक्र करने पर संसद में हंगामा हुआ। चतुर्वेदी ने किताब छपने से रोकने, विपक्ष की आवाज दबाने को लोकतंत्र विरोधी बताया। राजनाथ सिंह, किरण रिजिजू, अमित शाह जैसे मंत्रियों की आपत्ति शर्मनाक है। गलवान की सच्चाई जनता को जाननी चाहिए, इसे छिपाना राष्ट्रहित के खिलाफ है।