
वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच लंबे इंतजार के बाद बने व्यापार समझौते को प्रमुख भारतीय-अमेरिकी व्यवसायिक नेताओं ने जमकर सराहा है। हालांकि, नीति विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक कदम तो माना, लेकिन पूर्ण विवरण आने तक सतर्क रहने की सलाह दी।
वेंचर कैपिटल निवेशक आशा जडेजा मोटवानी ने बताया कि ट्रंप प्रशासन में फरवरी से ही इसकी तैयारी चल रही थी। उन्होंने कहा, ‘यह इतनी तेजी से होगा, यह अपेक्षा से परे था।’ मोटवानी को भरोसा है कि पीएम मोदी रूसी तेल के विकल्प में अमेरिकी या सहयोगी देशों का तेल अपनाने को तैयार हैं। टैरिफ 25 से घटकर 18 प्रतिशत होना आदर्श परिणाम है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वॉशिंगटन भारत को ऊर्जा, रक्षा व तकनीक में महत्वपूर्ण साझेदार मानता है। दोनों देशों के निजी क्षेत्र को बिना विलंब साझेदारी बढ़ानी चाहिए।
पूर्व अमेरिकी वाणिज्य सहायक सचिव रेमंड विकरी ने सतर्क स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता संबंधों में आई गिरावट को रोकता है, जो टैरिफ व वीजा विवादों से उपजी थी। टैरिफ कटौती अच्छी है, मगर उत्पादों पर स्पष्टता की कमी है, खासकर कृषि, डेयरी, दालों पर।
500 अरब डॉलर अतिरिक्त खरीद के दावे पर उन्होंने संदेह जताया, क्योंकि मौजूदा व्यापार 200 अरब डॉलर है।
सीएसआईएस के रिक रॉसो ने 2025 में भारी टैरिफ के बावजूद 16 प्रतिशत व्यापार वृद्धि की सराहना की। उन्होंने इसे पहले चरण बताया, जो बाजार पहुंच सुधारता है।
ओहियो के रिपब्लिकन नेता नीरज अंटानी ने इसे संबंधों के लिए ऐतिहासिक बताया, पारस्परिक कटौती व रूसी तेल रोक पर खुशी जताई।
उद्यमी योगी चुग ने इसे प्रवासी कारोबार के लिए बड़ा अवसर माना।
लंबे समय से चली बातचीत टैरिफ व बाजार पहुंच पर अटकती रही, फिर भी व्यापार 200 अरब पहुंचा। ऊर्जा सुरक्षा, खनिज, रक्षा पर सहयोग बढ़ेगा, पूर्ण दस्तावेज से तस्वीर स्पष्ट होगी।