
नई दिल्ली में बजट 2026-27 की घड़ी आने वाली है। रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भाषण पेश होगा, जिससे 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग को लेकर आशान्वित हैं। सभी चाहते हैं कि वेतन व पेंशन वृद्धि की प्रक्रिया में तेजी आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में पूर्ण रूप से वेतन बढ़ोतरी लागू करना कठिन होगा। आयोग का गठन हुए अभी केवल तीन माह ही बीते हैं और रिपोर्ट के लिए 18 माह का समय है। मई 2027 तक रिपोर्ट आने की संभावना है।
फिर भी, यदि बजट में वेतन वृद्धि के लिए अलग से धनराशि का प्रावधान किया जाता है, तो यह सरकार की गंभीरता दर्शाएगा। इससे आयोग पक्षकारों से जल्दी चर्चा कर रिपोर्ट समय से पहले सौंप सकता है।
नए आयोग लागू होने पर महंगाई भत्ता व राहत शून्य हो जाती है, फिर क्रमिक वृद्धि होती है। वर्तमान 58 प्रतिशत की दर (अक्टूबर संशोधन के बाद) सातवें आयोग के चरम से कम है। सातवें आयोग का वार्षिक खर्च लगभग 1.02 लाख करोड़ था।
अब कर्मचारियों-पेंशनधारकों की संख्या बढ़ने से 8वें आयोग का बोझ 2.4 से 3.2 लाख करोड़ तक हो सकता है। कम फिटमेंट फैक्टर पर भी लाभ होगा। यह बजट लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधार सकता है।