
आयुर्वेद की परंपरा में जड़ी-बूटियों के साथ-साथ धातुओं का भी चिकित्सकीय उपयोग सदियों से होता आ रहा है। इन्हीं में सबसे अनमोल है हीरा भस्म, जिसे वज्र भस्म या हीरक भस्म भी कहा जाता है। यह शुद्ध हीरे से निर्मित होकर शरीर के तीनों दोषों- वात, पित्त और कफ- के असंतुलन को दूर करती है तथा पुरानी से पुरानी बीमारियों का निवारण करती है।
निर्माण प्रक्रिया अत्यंत जटिल है। उच्च कोटि के हीरे को रस सिंदूर, शुद्ध गंधक और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर बार-बार शोधित किया जाता है। उसके बाद इसे हवाबंद बर्तन में 14 बार गर्म किया जाता है। इससे प्राप्त एक ग्राम भस्म की कीमत भी मूल्यवान हीरे के बराबर होती है।
हृदय रोगों में यह विशेष लाभकारी है। कमजोर दिल को ताकत देती है, रक्त संचार सुधारती है और धमनियों को मजबूत बनाती है। अस्थमा, मधुमेह, मोटापा, बांझपन तथा सूजन जैसी समस्याओं में राहत प्रदान करती है। कैंसर, ट्यूमर, क्षय रोग, गठिया और अस्थि मज्जा विकारों के उपचार में भी इसका व्यापक उपयोग है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली यह भस्म टॉनिक की भांति कार्य करती है। थकान मिटाती है, स्फूर्ति प्रदान करती है। स्मृति व एकाग्रता में वृद्धि कर मस्तिष्क को तीव्र बनाती है। पुरुषों की शारीरिक दुर्बलता दूर करने में सहायक। आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से ही सेवन करें। यह आयु बढ़ाने और जीवन गुणवत्ता सुधारने का प्राकृतिक स्रोत है।