
भारतीय सिनेमा की दुनिया में सुरैया जैसी प्रतिभा कम ही देखने को मिलती है। 15 जून 1929 को लाहौर में जन्मीं सुरैया जमाल शेख का परिवार एक साल की उम्र में ही मुंबई आ गया। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम याद करते हैं इस अभिनेत्री और गायिका को, जिन्होंने बिना किसी औपचारिक संगीत शिक्षा के लाखों दिल जीत लिए।
‘मलिका-ए-हुस्न’ के नाम से मशहूर सुरैया ने घर पर मां द्वारा बजाए जाने वाले के.एल. सहगल, खुर्शीद और कानन देवी के गानों से संगीत सीखा। बचपन में ही ऑल इंडिया रेडियो पर गाने लगीं। मात्र 12 साल की उम्र में फिल्म ‘ताजमहल’ से अभिनय यात्रा शुरू की, जहां उन्होंने मुमताज का रोल निभाया।
संगीतकार नौशाद ने उनकी आवाज को पहचाना और 1942 की ‘शारदा’ में प्लेबैक का मौका दिया। ‘नई दुनिया बसेगी आज’ जैसे गीतों ने धूम मचा दी। करियर में 70 से अधिक फिल्में और 330 गाने गाए, जिनमें ‘अनमोल घड़ी’, ‘दर्द’, ‘जीत’, ‘सनम’, ‘दास्तां’, ‘रुस्तम सोहराब’ जैसी हिट्स शामिल हैं।
देव आनंद संग ‘नीली’, ‘विद्या’ जैसी फिल्मों ने रोमांस की मिसाल कायम की, हालांकि शादी न हो सकी। सहगल साहब ने करियर की शुरुआत में भरपूर सहयोग किया। सदाबहार गीत ‘दिल-ए-नादान’, ‘ओ दूर जाने वाले’, ‘तेरा ख्याल’ आज भी गूंजते हैं।
1963 के बाद फिल्मों से संन्यास ले लिया। मरीन ड्राइव के फ्लैट में एकांत जीवन जिया। 31 जनवरी 2004 को निधन हो गया, लेकिन उनकी मधुर आवाज अमर है।