
वाशिंगटन में हुई चर्चा में भारत और फ्रांस के राजदूतों ने नई दिल्ली के आगामी एआई इम्पैक्ट समिट को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक शासन में विकासशील देशों के लिए मील का पत्थर करार दिया। सीएसआईएस सम्मेलन के दौरान भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा और फ्रांसीसी राजदूत लॉरेंट बिली ने कहा कि फरवरी 2026 में आयोजित यह शिखर सम्मेलन समावेशिता, विकास और व्यावहारिक परिणामों पर केंद्रित होगा।
क्वात्रा ने इसे विकासशील देश में पहली बार इतने बड़े स्तर का वैश्विक एआई आयोजन बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई केवल विकसित राष्ट्रों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी होना चाहिए। सम्मेलन के तीन मुख्य आधार हैं- व्यक्ति, पृथ्वी और समृद्धि, जिसका लक्ष्य एआई को आम जन तक पहुंचाना है।
बिली ने 2025 पेरिस एआई एक्शन समिट से शुरू सहयोग को मजबूत करने की बात कही। वहां नीतियों से आगे बढ़कर उपयोग और निवेश पर जोर दिया गया था। दिल्ली समिट में टिकाऊ और जनकल्याणकारी एआई पर विशेष सत्र होंगे।
समिट में विशाल एआई एक्सपो, शोध कार्यक्रम, उद्योगपतियों की बैठकें और नेताओं की संयुक्त घोषणा शामिल होगी। क्वात्रा ने कहा कि अब सिद्धांतों से हटकर वास्तविक प्रभाव पर ध्यान है। दोनों ने वैश्विक नियमों में एकरूपता के साथ राष्ट्रीय नीतियों का सम्मान जरूरी बताया।
फ्रांस में पेरिस के बाद कंप्यूटिंग और शोध में भारी निवेश हुआ, वहीं भारत में वैश्विक कंपनियां एआई बुनियादी ढांचे में पूंजी लगा रही हैं। भारत की जनसंख्या और डिजिटल उभार इसे एआई परीक्षण के लिए आदर्श बनाते हैं। यह ब्रिटेन, कोरिया और फ्रांस के सम्मेलनों की कड़ी को मजबूत करेगा।