
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की प्रमुख कंपनी ओला इलेक्ट्रिक ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि वह संगठनात्मक परिवर्तनों के तहत करीब 5 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी करेगी। यह कदम कंपनी की दक्षता बढ़ाने और बाजार में मजबूत स्थिति बनाने की दिशा में उठाया गया है।
कंपनी के बयान में कहा गया कि फ्रंटएंड ऑपरेशंस में स्वचालन को बढ़ावा देकर वे गति और अनुशासन पर जोर दे रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर सेवा देना और लंबे समय तक लाभदायक विकास सुनिश्चित करना है।
हाइपरसर्विस मॉडल से अब देश के 80 प्रतिशत से ज्यादा सेवा अनुरोध उसी दिन निपटाए जा रहे हैं, जो कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, बाजार हिस्सेदारी 2024 के 36.7 प्रतिशत से घटकर 2025 में 16.1 प्रतिशत रह गई है। पारंपरिक कंपनियों ने इस दौरान अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
सेवा में देरी और डिलीवरी की अनियमितताओं से ग्राहक नाराजगी बढ़ी है। वित्तीय मोर्चे पर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 418 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज हुआ, जबकि परिचालन राजस्व 43 प्रतिशत गिरकर 690 करोड़ रुपये पर सिमट गया।
ओला इलेक्ट्रिक अब अपने कारोबार को पटरी पर लाने के लिए कृतसंकल्प है। ये बदलाव कंपनी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं या चुनौतियों को और गहरा सकते हैं। भारतीय ईवी बाजार के इस दौर में ओला का सफर रोचक बना रहेगा।