
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) ने फ्रांस जाने वाले दो संदिग्धों को फर्जी दस्तावेजों के साथ पकड़ लिया। यह कार्रवाई न केवल एक साधारण गिरफ्तारी थी, बल्कि इमिग्रेशन फ्रॉड और सरकारी भ्रष्टाचार के गठजोड़ को सामने लाई।
संदिग्धों ने खुद को फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) के कर्मचारी बताकर यूरोपीय संसद की बैठक में जाने का दावा किया। उनके पास कथित आधिकारिक ईमेल थे, लेकिन जांच में कुछ भी साबित नहीं हो सका। न तो नौकरी का प्रमाण, न यात्रा अनुमति और न ही कोई वैध पत्र।
उनकी फ्लाइट प्लान में पेरिस से उसी दिन बार्सिलोना जाने का प्रोग्राम था, जो आधिकारिक यात्रा के दावे से मेल नहीं खाता। यह स्पष्ट करता है कि उनका मकसद यूरोप में शरण लेना था।
मोबाइल फोन और बैंक रिकॉर्ड्स से खुलासा हुआ कि एक मध्यस्थ के साथ लगातार संपर्क और लाखों रुपये के लेन-देन थे। यह संगठित नेटवर्क का संकेत देता है, जो विजिट वीजा का दुरुपयोग कर अवैध प्रवासन को बढ़ावा दे रहा है।
ऐसे घोटाले पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख को धक्का पहुंचाते हैं और सच्चे यात्रियों के लिए वीजा प्रक्रिया कठिन बना देते हैं। एफबीआर अधिकारी की भूमिका साबित होने पर आंतरिक निगरानी पर सवाल उठेंगे।
एफआईए की जांच जारी है, जो बड़े खुलासे कर सकती है। सरकार को अब सख्त सुधार करने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।