
वॉशिंगटन। वैश्विक वित्तीय निगरानी संस्था एफएटीएफ ने पाकिस्तान के खिलाफ चेतावनी जारी की है। 40 सिफारिशों का कागजी ढांचा तो तैयार है, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन में बड़ी खामियां बरकरार हैं। 2025 की आतंकी वित्तपोषण रिपोर्ट में कहा गया कि पाक से जुड़े संगठन अब बैंकिंग से हटकर फिनटेक का इस्तेमाल कर नजरों से बच रहे हैं।
‘द सिफर ब्रीफ’ में विश्लेषक सिद्धांत किशोर ने लिखा कि फरवरी 2026 में मेक्सिको सिटी की एफएटीएफ बैठक में पाकिस्तान फिर सुधारों का दावा पेश करेगा। लेकिन हकीकत में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे समूह सक्रिय हैं।
ये संगठन गाजा संकट का फायदा उठा रहे हैं। मसूद अजहर के बेटे हम्माद और भाई तल्हा डिजिटल वॉलेट से छोटे दान और क्रिप्टो के जरिए फंड जुटा रहे हैं। चेन-हॉपिंग से पहचान छिपाते हैं।
ये पैसे 300 से ज्यादा मस्जिदों के निर्माण और भारत के ऑपरेशन सिंदूर से क्षतिग्रस्त लश्कर कैंपों के पुनर्निर्माण में लग रहे हैं। रिपोर्ट में अमेरिका-यूरोप से परिणाम-आधारित जांच की मांग की गई है। संपत्ति जब्ती और नेटवर्क तोड़ना जरूरी है।