
नई दिल्ली। थलापति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘लियो’ के रिलीज विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर दिया है, जिसमें बोर्ड की सुनवाई के बिना किसी एकतरफा आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई है।
यह कदम मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के हालिया फैसले के बाद उठाया गया, जिसमें सिंगल जज के यूए सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश को रद्द कर दिया गया। फिल्म 9 जनवरी को पोंगल पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन सर्टिफिकेशन में देरी हो गई।
दिसंबर 2023 में केवीएन प्रोडक्शंस ने फिल्म सीबीएफसी को सौंपी। प्रारंभिक समीक्षा में कुछ दृश्यों पर कट्स और संवाद म्यूट करने की सलाह दी गई। निर्माताओं ने संशोधन कर दोबारा प्रस्तुत किया, मगर शिकायतों पर रिवाइजिंग कमेटी को भेजा गया।
मद्रास हाईकोर्ट ने 9 जनवरी को सीबीएफसी को यूए सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया। डिवीजन बेंच ने इसे रोक दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 15 जनवरी को हस्तक्षेप से इनकार कर हाईकोर्ट को 20 जनवरी तक फैसला करने को कहा।
विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही ‘लियो’ में पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, प्रकाश राज हैं। राजनीति में एंट्री से पहले यह उनका स्वांसॉन्ग है। बोर्ड शिकायतों पर फैसला लेने का हक जताता है, निर्माता देरी को अनुचित ठहराते हैं।
फिल्म इंडस्ट्री इस पर नजर रखे हुए है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।