
सर्दियों का मौसम आते ही आंवला बाजारों में धूम मचाने लगता है। आयुर्वेद इसे अमृत फल कहता है, जो शरीर के त्रिदोषों को संतुलित कर हर रोग को जड़ से मिटा सकता है। आमतौर पर लोग आंवले का कसैला रस पीने या फल चखने से कतराते हैं, लेकिन आंवला पानी इसकी जगह ले सकता है—बिना स्वाद बिगाड़े पूर्ण लाभ देता हुआ।
रात में आंवला कद्दूकस या टुकड़ों में काटकर एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह उबालकर छान लें और खाली पेट पिएं। यह विधि पित्त को शांत रखते हुए पाचनाग्नि को मजबूत बनाती है तथा ओजस का निर्माण करती है।
इसके फायदे गजब के हैं—अम्लता व शरीर की गर्मी दूर, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी हुई, बाल-त्वचा निखरी, रक्त शुद्ध व विषाक्त पदार्थ बाहर। रसायन की भांति कार्य करता यह जल, रोज एक माह तक सेवन से चमत्कारिक परिणाम।
सावधानी बरतें: कमजोर पाचन या कफ-जन्य सर्दी-जुकाम में रस न लें, ठंडी तासीर कफ बढ़ा सकती है। आंवला पानी सुरक्षित विकल्प है, जो सभी के लिए उपयुक्त। अपनाएं इस प्राचीन नुस्खे को और स्वस्थ रहें।