
सोनीपत। ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में सिरिल अमरचंद मंगलदास के मैनेजिंग पार्टनर और सिरिल श्रॉफ सेंटर फॉर एआई, लॉ एंड रेगुलेशन के चेयरपर्सन सिरिल श्रॉफ ने एक विशेष पब्लिक लेक्चर में कानून के क्षेत्र में एआई के इनोवेशन और नैतिकता की अनिवार्यता पर जोर दिया। ‘कानून, नेतृत्व और विरासत: बदलते विश्व के लिए भारतीय कानूनी पेशे को पुनर्परिभाषित करना’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने भारत की राष्ट्रीय पहचान और संवैधानिक मूल्यों को नेतृत्व का केंद्र बताया।
श्रॉफ ने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत आत्मनिर्भरता और सभ्यतागत मूल्यों पर कायम रहकर अपनी अलग पहचान बना सकता है। संवैधानिक संस्थाओं के पतन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति घटते सम्मान के दौर में घरेलू कानून, संस्थाएं, अदालतें और राजनीतिक प्रक्रिया की भूमिका सर्वोपरि है। भारत सच्चा लोकतंत्र है जहां कार्यशील न्यायपालिका स्वतंत्र समाज का आधार है।
घरेलू संस्थाएं न केवल हमारी सभ्यता की नींव हैं बल्कि विदेशी संबंधों को भी परिभाषित करती हैं। 2000 साल पुरानी सभ्यता वाले भारत ने आक्रमणों का सामना किया लेकिन पहचान बरकरार रखी। दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संविधान जीवन का दर्पण है, जैसा डॉ. अंबेडकर ने कहा।
1991 की आर्थिक स्वतंत्रता के बाद कानून का शासन और नीतिगत लचीलापन जरूरी है। प्रौद्योगिकी, संप्रभुता और एआई भविष्य निर्धारित करेंगे। इसी सोच से सिरिल श्रॉफ सेंटर की स्थापना हुई। 2047 तक विकसित भारत के लिए कानूनी पेशे को आधुनिक बनाना होगा, जैसा उनकी फर्म ने करियर ट्रैक और समावेशी पार्टनरशिप से किया।
एआई काम बदल रहा है, नए कानून ला रहा है। नैतिकता, विवाद समाधान में तकनीक, न्याय प्रशासन में नवाचार और न्याय पहुंच सुधार मुख्य हैं। शिक्षा-निजी क्षेत्र-सरकार के तालमेल की कमी नवाचार रोक रही है।
फर्म पार्टनर परिधि अदाणी ने सेंटर की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। जेजीयू के संस्थापक वीसी प्रो. सी. राज कुमार ने श्रॉफ की उपलब्धियों और साझेदारी की सराहना की। श्रॉफ ने लैंगिक संतुलन पर बल दिया, जहां उनकी फर्म में महिलाएं बहुसंख्यक हैं। युवा वकीलों से पेशे को भविष्योन्मुखी बनाने का आह्वान किया। प्रमुख बिंदु: एआई-कानून संबंध, वैश्विक एआई शासन में सेंटर की भूमिका, बहु-विषयक सहयोग।