
देशभर में कश्मीरी शॉल बेचने वालों पर हो रहे हमलों ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खेउहामी ने सरकार से तत्काल सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक-दो घटनाओं के नाम पर पूरे समुदाय को निशाना बनाना अन्यायपूर्ण है।
कुपवाड़ा के 18 वर्षीय युवक पर विकास नगर में हुई मारपीट का जिक्र करते हुए खेउहामी ने बताया कि स्थानीय मुस्लिम सेवा संगठन ने इसकी सूचना दी। पीड़ित छात्र शॉल बेचकर परिवार की मदद करता है। सर्दियों में कश्मीर का विंटर सेशन चलने पर यह परंपरा 30-40 वर्षों से चली आ रही है।
युवक ने बताया कि पूछताछ में कश्मीर और मुस्लिम होने का खुलासा करने पर पहलगाम-दिल्ली घटनाओं पर बहस छिड़ गई। इसी दौरान भीड़ ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया, जिससे सिर-शरीर पर गंभीर चोटें आईं और 15 टांके लगे।
अल्मोड़ा, नैनीताल, देहरादून जैसे क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। गढ़वाल-कुमाऊं में ये विक्रेता स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, लेकिन असुरक्षा का शिकार हो रहे हैं।
खेउहामी ने अपील की कि जेकेई कामगारों की हिफाजत हो और हिंसकों पर सख्ती बरती जाए। जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है, इसके लोग कहीं भी काम कर सकते हैं। बिना कार्रवाई के सामाजिक एकता को खतरा है। ये मेहनतकश निर्दोष हैं, उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।