
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोबाइल की लत, गड़बड़ खान-पान, पानी की कमी और तनाव ने स्वास्थ्य को चपेट में ले लिया है। त्वचा रूखी पड़ना, पेट की गड़बड़ी और जोड़ों में दर्द आम हो गए हैं। योग की मुद्राएं इन परेशानियों से निजात दिला सकती हैं। वरुण मुद्रा जल तत्व को संतुलित कर शरीर को अंदर से तरोताजा बनाती है।
योग शास्त्रों में शरीर को पांच तत्वों का समूह बताया गया है, जिसमें जल का स्थान खास है। जल की कमी से त्वचा बेजान, पाचन सुस्त और जोड़ कठोर हो जाते हैं। वरुण मुद्रा का नियमित अभ्यास इनका संतुलन बहाल करता है।
त्वचा के लिए यह वरदान है। रसायनों से भरे उत्पादों और कम पानी से सूखी त्वचा को अंदरूनी नमी मिलती है। चमक बढ़ती है, रूखापन गायब हो जाता है।
पेट की परेशानियां जैसे कब्ज, गैस, अपच दूर होती हैं। आंतों को सही नमी मिलने से मल त्याग सहज हो जाता है, पेट हल्का रहता है।
जोड़ों का दर्द और सूजन कम होती है। चिकनाई बढ़ने से गतिविधियां आसान हो जाती हैं। एसिडिटी में भी आराम मिलता है।
अभ्यास सरल: शांत स्थान पर बैठें, कनिष्ठिका और अंगूठे के अग्रभाग जोड़ें, बाकी उंगलियां सीधी। 15-20 मिनट गहरी सांस लें। रोज अपनाएं, बदलाव महसूस करें।