
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। मैनमेड एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पूर्व चेयरमैन डॉ. संजीव सरन ने इसे ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीतिक स्थिरता, मजबूत शासन व्यवस्था और विशेष रूप से टेक्सटाइल क्षेत्र की आंतरिक क्षमताएं इस समझौते को सफल बनाएंगी।
डॉ. सरन के अनुसार, यह समझौता भारत को विशाल यूरोपीय बाजार की पहुंच प्रदान करेगा। अन्य देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ बाधाओं से होने वाले नुकसान में राहत मिलेगी। इससे नई निवेश, संयुक्त उद्यम और रोजगार के अपार अवसर खुलेंगे। यह सौदा संतुलित है, जिसमें दोनों पक्ष लाभान्वित होंगे।
टेक्सटाइल, वस्त्र, चमड़ा, रत्न-आभूषण जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। ईयू बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच से भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे रोजगार में वृद्धि स्वाभाविक होगी।
27 जनवरी को घोषित यह ‘सभी सौदों की मां’ समझौता 2007 से चला आ रहा था, जो 2013 में रुका और 2022 में पुनः प्रारंभ हुआ। इसमें लगभग 20 अरब उपभोक्ता और वैश्विक जीडीपी का एक चौथाई शामिल है। ईयू भारत से 99 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ समाप्त करेगा, जबकि भारत 93-96.6 प्रतिशत पर।
भारत की स्थिरता इस सौदे की ताकत है, जो व्यापार, निवेश और रोजगार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।