
भारत के पूंजी बाजार में खुदरा निवेशकों का जोरदार प्रवेश हो रहा है। संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 2.35 करोड़ नए डीमैट खाते जोड़े गए। यह आंकड़ा भारतीय परिवारों में वित्तीय जागरूकता और बाजार पर भरोसे को दर्शाता है, खासकर वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच।
विदेशी पूंजी में उतार-चढ़ाव के बावजूद अप्रैल-दिसंबर के दौरान शेयर बाजार मजबूत रहे। घरेलू निवेश, कंपनियों के बेहतर परिणाम, कर राहत, घटती महंगाई और उदार मौद्रिक नीतियों से निफ्टी में 11.1 प्रतिशत तथा सेंसेक्स में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सितंबर 2025 में 12 करोड़ से अधिक यूनिक डीमैट निवेशक बन गए, जिनमें 25 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। म्यूचुअल फंड क्षेत्र में दिसंबर तक 5.9 करोड़ यूनिक निवेशक हो गए, जिसमें 3.5 करोड़ टियर-1/2 शहरों से बाहर के हैं।
घरेलू बचत अब शेयरों और म्यूचुअल फंड्स की ओर मुड़ रही है। वित्तीय बचत में इनकी हिस्सेदारी 2011-12 के 2 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 15 प्रतिशत से अधिक हो गई। एसआईपी में उछाल इसका बड़ा कारण है—मासिक निवेश 2016-17 के 4,000 करोड़ से अब 28,000 करोड़ से ज्यादा पहुंच गया।
आईपीओ की संख्या 20 प्रतिशत और जुटाई गई राशि 10 प्रतिशत बढ़ी। 217 एसएमई लिस्टेड होकर 9,600 करोड़ जुटाए। कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार दशक भर से 12 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ा, 2024-25 में 9.9 लाख करोड़ नए बॉन्ड जारी हुए।
यह सर्वेक्षण निवेश संस्कृति के प्रसार को रेखांकित करता है, जहां आम आदमी बचत के साथ निवेश को अपनाने को उत्सुक है।