
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक फरवरी से 15 फरवरी तक राजिम कुंभ कल्प मेला आयोजित होने जा रहा है। इस पवित्र मेले की तैयारियां जोरों पर हैं और हर साल लाखों भक्त यहां कल्पवास के लिए उमड़ते हैं। प्रयागराज के माघ मेले की तर्ज पर यहां भी धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। मान्यता है कि यहीं सृष्टि की उत्पत्ति हुई, जब भगवान विष्णु की नाभि से कमल निकला और ब्रह्मा ने सृष्टि रची।
राजीव लोचन मंदिर इस मेले का केंद्र है। चार धामों की यात्रा का फल यहां एक दर्शन से मिल जाता है। भगवान विष्णु चार रूपों में विराजमान हैं और दोपहर की आरती में भोग पर उंगलियों के निशान मिलते हैं, जो आज तक रहस्यमय बने हैं।
नौवीं शताब्दी का यह मंदिर विष्णु को बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था में दर्शन कराता है। बारह स्तंभों पर दुर्गा, गंगा-यमुना व अवतारों की नक्काशी है। माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलने वाले मेले में जगन्नाथ पुरी की यात्रा अधूरी मानी जाती है बिना राजिम आए।
इस बार शराब की दुकानों पर बंदी का आदेश नहीं आया, जो परंपरा तोड़ सकता है। स्थानीय मांग है कि मांस की दुकानें भी बंद हों। राजिम छत्तीसगढ़ का दूसरा प्रयाग बन चुका है, जहां भक्ति का सैलाब बहेगा।
