
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर का राजनीतिक सफर संघ की विचारधारा से शुरू होकर केंद्र की कैबिनेट तक पहुंचा है। 30 जनवरी 1951 को पुणे में जन्मे जावड़ेकर ने छात्र जीवन से ही सक्रियता दिखाई। एमईएस कॉमर्स कॉलेज में प्रोफेसर श्रीपति शास्त्री, दामू अन्ना दते जैसे मार्गदर्शकों से प्रेरित होकर 1969 में एबीवीपी से जुड़े। 1972 में गोपीनाथ मुंडे के साथ जयप्रकाश नारायण सम्मान समिति के सचिव बने।
1975 में पुणे यूनिवर्सिटी सीनेट सदस्य चुने गए। इमरजेंसी के खिलाफ 11 दिसंबर को 11 कॉलेजों में सत्याग्रह का नेतृत्व किया। येरवडा जेल में ‘निर्भय’ पत्रिका शुरू की, जो 400 कैदियों में लोकप्रिय हुई। बालासाहेब देवरस से प्रभावित होकर जेल में कार्यक्रम चलाए। 1980 में भाजपा बनते ही शामिल हुए। 1981 में बैंक छोड़ पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। भाजयुमो महासचिव रहे, बेरोजगारी पर अभियान चलाए। महाराष्ट्र में ‘संघर्ष रथ’ यात्रा निकाली, 1989 मुंबई में युवा जुटाए।
2008 में महाराष्ट्र से राज्यसभा, 2014 में आठवले के लिए सीट छोड़ी लेकिन मध्य प्रदेश से गए। मोदी कैबिनेट में पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), फिर सूचना-प्रसारण, अंततः मानव संसाधन मंत्री। कर्नाटक-राजस्थान चुनावों में संकटमोचक।
नागरिकता कानून के विरोध के दौरान दिल्ली बैठक में शाहनवाज हुसैन ने उन्हें ‘जावेद भाई’ कहा। सब हैरान। हुसैन ने जम्मू यात्रा का किस्सा सुनाया- स्थानीय अखबारों ने नाम ‘जावेदकर’ लिखा, भाजपा का नया मुस्लिम चेहरा बताया। नाम चिपक गया, चुटकियां चलने लगीं। मुस्लिम समुदायों के बीच उन्हें भेजने की बात हुई। जावड़ेकर का यह किस्सा उनकी बहुमुखी छवि दर्शाता है।