
नई दिल्ली। आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 2027 में वित्त वर्ष 2026 की तुलना में थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन यह नियंत्रण में रहेगी। वर्तमान वित्त वर्ष में महंगाई में भारी नरमी आई है और यह आरबीआई के 4 प्रतिशत (±2 प्रतिशत) लक्ष्य के दायरे में बनी रहेगी।
सर्वेक्षण के अनुसार, दिसंबर 2025 में आरबीआई ने वित्त वर्ष 26 के लिए 2 प्रतिशत महंगाई का अनुमान जताया, जबकि आईएमएफ ने 2.8 प्रतिशत का आकलन किया। इसका कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी है। लेकिन वित्त वर्ष 27 में मेटल कीमतों में उछाल महंगाई के लिए बड़ा खतरा है। कॉपर, एल्यूमिनियम और लोहे जैसे धातुओं की मांग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा और डेटा सेंटर्स से बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति सीमित है। इससे विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों की लागत बढ़ेगी।
वित्त वर्ष 2026 में खाद्य महंगाई में भारी गिरावट का श्रेय अच्छी मानसून, जलाशयों का बेहतर स्तर और फसलों की अधिक पैदावार को जाता है। लेकिन आगे गिरावट सीमित है। जैसे-जैसे आधार प्रभाव कम होगा, महंगाई अपने आप बढ़ेगी।
सोना-चांदी की कीमतें बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा होगा। खाद्य महंगाई भी बढ़ेगी। सर्वेक्षण आपूर्ति प्रबंधन पर जोर देता है, ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे।