
नई दिल्ली, 29 जनवरी। भारत और यूरोपीय संघ के बीच स्वतंत्र व्यापार समझौता (एफटीए) देश की आर्थिक यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह समझौता न केवल निर्यात को गति देगा, बल्कि नवाचार और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। वाणिज्य मंत्रालय के अधीन ईएससी के चेयरमैन वीर सागर ने विशेष बातचीत में इसे ऐतिहासिक बताया।
उन्होंने कहा कि इसकी सबसे बड़ी ताकत बराबरी का साझा मंच है। आईटी क्षेत्र में भारत अब केवल श्रम या आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि, डिजाइन, विकास, ऑटोमेशन और एआई जैसे उन्नत क्षेत्रों में यूरोपीय साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा।
पहले यूरोप में नौकरी या पढ़ाई के लिए वीजा और मंजूरी की प्रक्रिया जटिल थी। अब यह आसान हो जाएगी, जिससे लोगों का आवागमन सुगम होगा और कार्य व शिक्षा सहयोग मजबूत बनेगा।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लिए यह वरदान है। कुछ हिस्से भारत में, कुछ यूरोप में बनेंगे और संयुक्त उत्पादन होगा। इससे साझा उत्पादन मॉडल विकसित होगा।
वीर सागर ने जोर देकर कहा कि भारत अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का मजबूत कड़ी बन चुका है। आयात पर निर्भरता घटकर स्वदेशी उत्पादन बढ़ा है। ऑटो, फार्मा, कृषि, बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में भी बड़े अवसर खुलेंगे।
यह साझेदारी ज्ञान विनिमय, तकनीक हस्तांतरण और सहयोगी निर्माण को प्रोत्साहित करेगी। नतीजतन, निर्यात बढ़ेगा और भारत वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में उभरेगा।